सिंहस्थ कहॉ नासिक या त्र्यंबकेश्वर मे ?

Kalaram Mandir

यह वाद-विवाद पंडितो में अनंतकाल से चला आ रहा है । इस कलह मे डुबे पंडितो को गंगा कहलाती है । नदी के तट पद झगडा करने की बजाय मुझमे स्नान किजीये । मन मे बसी इस तूतू-मैमै का मुझमे विर्सजन किजीये । आपके इस प्रश्न का उत्तर आपने आपही मिल जायेगा । त्र्यंबकेश्वर आओगें तो प्रश्न कैलासवाशी होगे और मन की शंका वैकुंठवासी ।

Trimbakeshwarकलह, झगडे मतलब सूरज के सफेद बादल । इन बादलों मे पानी नही रहता । यह बादल प्यास नही बुजाते, ज्ञान की भूक को तृप्त नही करते । प्रेम और ज्ञान की प्यास बुझानेवाली ज्ञानगंगा है । वही गोदावरी है । कलह शांती के लिए सिंहस्थस्नान है । कलह सभी जगह होता है । साधू-संत भी इससे परे नही । बहुत सालो पहले शैव-वैष्णव साधू कुशावर्त मे एकत्रित स्नान करते थे । परंतु स्नान करने के अग्रक्रम के कारण उनमे झगडा हो गया । परंतु स्नान करने के अग्रक्रम के कारण उनमे झगडा हो गया । यह झगडा इतना बढ गया की तलवार, भाले, त्रिशूल, लाठी का उपयोग एक दुसरे पर वार करने के लिये साधुओंने किया । कुशावर्तने खुन की होली देखी । तभी वैष्णवोंने नाशिक तथा शैवोने त्र्यंबकेश्वर मे स्नान करने का निर्णय लिया गया । सभी सांधूके आखाडे त्र्यंबकेश्वरमें ही रहते है । सिंहस्थ के शाही स्नान का मान कुशावर्त को तीर्थराज की उपाधी प्राप्त हुई । सांधूओ का इस दरम्यान का जलसा ज्ञान की शोभायात्रा है ।

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