शिखरे पुरोहितजी के बारें में

shikhare b.s.त्रिबंकेश्वरके शिखरे परिवार एक पुरोहित परिवार है। यह परिवार गत १२०० सालोंसे त्रिबंकेश्वरके निवासी है। उनका मुख्य काम याने विविध प्रकारकी पुजा करना एवं करवाना और अन्य धार्मिक विधीयोंका विधिवत करना। स्वर्गीय श्री. शंकर सखाराम शिखरेजी ने पिछली शताब्दी में पुरोहित व्यवसाय मे अपने आपको समर्पित किया था। उनके सुपुत्र स्वर्गीय श्री. सांभ शंकर शिखरे अपने पिताजी के कदमों पर चलकर पुरोहित की परंपरा पैतीस सालोंसे जादा संभाली । वो हिंन्दू धर्म की सभी प्रकारकी पुजा, विधी, नारायणबली, नागबली, कालसर्पशांती पुजा, त्रिपिंडी श्राध्द आदि पुजा विधिवत करने मे माहिर एवं कुशल है।

उनके सुपुत्र श्री. भुषण सांभ शिखरे भी उनके परिवार की परंपरा पिछले पंद्रह सालोसे सशक्त बना रहे है। पुरोहित व्यवसाय के अलावा उन्हे फलज्योतिष मे भी दिलचस्पी है। यह कुशल पुरोहित और मशहुर फलज्योतिष शास्त्रज्ञ के. एस. कृष्णमुर्ति पध्दतीके अनुयायी है। के. पी. परंपरा के अनुसार पौरोहित्य करने वाले है। श्री भुषण शिखरेजी ने भारतीय परंपरा का फलज्योतिष शास्त्र का अध्ययन सन १९९० से १९९४ तक किया। पश्चात परंपराके फलज्योतिष शास्त्र की कुछ कठनाई के कारण उनका रुझान के. पी. परंपराकी और मुड गया।

भारतीय ज्योतिष शास्त्र एवं के. पी. पध्दती

भारत अनेक रिती-रिवाज और परंपराओं का देश है। उसके पुराण, वेद, गारिमान्य, सभ्यता, उत्तम विचारधारा के कारण एवं स्वगीय मनोहारी प्राकृतिक सुंदरता के कारण दुनियामे मशहूर है।

यह देश गौरव संपन्न कथाओंका एवं आदर्श पुराण कथाओंका देश है। इन कथाओं मे संसार, विश्व, उत्पत्ति, विश्व का उदय एवं अंत, विभिन्न देवता, श्रेष्ठ ऋषी - मुनी, महान संत आदि की कथाओंका वर्णन है। इस देश के मंदिरो का उत्तम व्यवस्थापन एवं व्यवस्था पुरे विश्व के लिए एक अनिवार्य जनादेश ही है।

इस देशने विश्व का 'शुन्य' (०) संकल्पना दी है। मशहूर गणितज्ञ 'कनाड' आर्यभट्ट एवं महान मंहत 'ज्योतिषियोंने' फल ज्योतिष शास्त्र का गहन अध्ययन किया है और हमे कई मशहूर फल ज्योतिषी दिये है।

हमारी पुरानी परंपराओंका ज्योतिषशास्त्र हमे नक्षत्र, उनकी गति एवं स्थान आदी बातों पर जन्मकुंडली के विषय मे जानकारी देता है। परंतु आज के आधुनिक विज्ञान ने यह सिध्द करके दिखाया है, की इजिप्त के पिरॅमिड, मलेशिया के मंदिर, एवं भारत के कई मंदिर दस हजार वर्ष पहले नक्षत्र एवं तारो के स्थानोंका अध्ययन करने के पश्चात बनाये गये थे। इसलिए हमे हमारे अनुपम शिल्पोपर एवं फलज्योतिष शास्त्रज्ञों पर गर्व

फलज्योतिष शास्त्र एवं जन्मकुंडली या जन्मपत्री

श्री. बी. एस. शिखरे के. एस. कृष्णमुर्ती के ज्योतिषशास्त्र के एक सच्चे अनुयायी है। अगर आपके कुछ सवाल या समस्याऍ ज्योतिषशास्त्र अथवा जन्मकुंडलीके बारे मे हो तो आपको निचे बताए गये कुछ नियमों के साथ चलना होगा।

Astrology and Horoscope१) के. पी. पध्दती के अनुसार भविष्य दो अलग तरीकोंसे बताया जा सकता है।

  • प्रश्नकुंडली
  • जन्मकुंडली या जन्मपत्री
२) प्रश्नकुंडली का भविष्य नब्बे प्रतिशत सही अपेक्षित होता है। और जन्मकुंडली से केवल साठ प्रतिशत।
३) प्रश्न कुंडली की पध्दती में आपको क्रमवार संख्या एक से दोसौं उनपचास इनमेसे किसी भी एक संख्या को झट से चुनना होता है।
४) कोई भी सवाल या समस्या का हल पुछने से पहले आपका ध्यान महत्वपूर्ण पुछे जानेवाले सवाल या समस्या पर केंद्रित होना आवश्यक है। और वही सवाल आपने झटसे पुछना होगा।
५) गहन प्रश्न या मुश्किल समस्याएँ जो जायदाद के बारेमें हो, व्यवसाय बदलाव के संदर्भमे हो, व्यापार या उद्योग के बारे में हो, परिवार जीवनसे संबधित हो, या वंध्यत्व के बारे में हो प्रश्न कुंडली के मदद से सुलझाई जा सकती है।
६) प्रश्न पुछने से पहले आप श्रध्दानवत होकर अपने आराध्य देवता की एवं माता-पिता की प्रार्थना करे।
७) ज्योतिष बताते वक्त हम त्र्यंबकेश्वर स्थान के अक्षांश एवं रेखांश का भी विचार करते है।
८) प्रश्न कुंडली पध्दती में हर एक प्रश्न या समस्या के लिये अलग संख्या का उपयोग किया जाता है। और पश्चात उसे सुलझाया जाता है।

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